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मध्यप्रदेश विधानसभा में हंगामे के बीच यूसीसी विधेयक पारित


भोपाल।

मध्य प्रदेश विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड- यूसीसी) विधेयक पारित हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक, हंगामा और नारेबाजी हुई। विपक्ष के तीखे विरोध और वॉकआउट के प्रयासों के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की कार्यवाही जारी रखते हुए विधेयक को पास घोषित कर दिया।

मंत्री गौतम टेटवाल ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 पर चर्चा के लिए सदन में प्रस्ताव पेश किया। सदन में प्रस्ताव रखते ही विपक्ष हमलावर हो गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए इसे विस्तृत समीक्षा के लिए प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की। हालांकि, सरकार ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया।

सदन में बढ़ते हंगामे और अव्यवस्था को देखते हुए अध्यक्ष तोमर ने कार्यवाही को पहले 10 मिनट और फिर 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक आतिफ अकील और आरिफ मसूद ने इस बिल को सत्ता पक्ष का राजनीतिक एजेंडा करार दिया। कांग्रेस नेताओं ने संविधान के अनुच्छेद 29 का हवाला देते हुए अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा का मुद्दा उठाया।

राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा विधेयक 

विधानसभा से यूसीसी विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद इसका राजपत्र (गजट) में नोटिफिकेशन जारी होगा। नोटिफिकेशन प्रकाशित होते ही मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू हो जाएगा। सरकार की तैयारी के मुताबिक, इसके जुलाई में ही प्रभावी होने की संभावना है।

एक पत्नी के रहते हुए दूसरा विवाह किया तो जेल जाना होगा-डॉ मोहन यादव

जो हिंदू की बात करेगा, वही राज करेगा। समानता हमारी संस्कृति का मूल है। "राम से रहीम तक, रविंद्र से रॉबिन तक, अमर से एंथोनी और अकबर तक, देश एक संविधान से चले। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मध्य प्रदेश में भेदभाव से मुक्ति मिलेगी और राज्य गोवा, उत्तराखंड और असम के बाद इस दिशा में कदम बढ़ाने वाले चुनिंदा राज्यों में शामिल होगा। प्रदेश के नागरिकों के सामाजिक और धार्मिक संस्कार पहले की तरह जारी रहेंगे। हालांकि, प्रदेश में होने वाले सभी विवाहों का शासकीय पंजीयन अनिवार्य होगा। पंजीयन नहीं कराने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। एक पत्नी के रहते हुए दूसरा विवाह किया तो जेल जाना होगा । कांग्रेस तुष्टिकरण और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करती रही है तथा देश की जनता की पीठ में खंजर घोंपने का काम किया है। आज के बाद मध्य प्रदेश में भेदभाव से मुक्ति मिलेगी। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब मध्य प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता लागू होने जा रही है।
 

अनुपूरक बजट पेश, सरकार ने 7,765.77 करोड़ का रखा प्रावधान

मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को सदन में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहला अनुपूरक बजट पेश किया। इसमें कुल 7,765.77 करोड़ रुपये का प्रावधान का प्रस्ताव रखा है। इस पर सदन में आज चर्चा होगी।  बजट में 907.59 करोड़ रुपये राजस्व मद तथा 6,858.18 करोड़ रुपये पूंजीगत मद के लिए रखे गए हैं। अनुपूरक बजट में सिंचाई परियोजनाओं, सड़क निर्माण, किसानों के हित, पुलिस आधुनिकीकरण, परिवहन, शिक्षा और पर्यटन समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है।

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