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उज्जैन बनेगी धर्म के साथ विज्ञान की राजधानी, महाकाल स्टैंडर्ड टाइम पर वैश्विक विमर्श शुरू


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साइंस सेंटर का लोकार्पण किया, 725 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया 

उज्जैन।

धार्मिक नगरी उज्जैन अब विज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में भी नई पहचान बनाने की ओर तेजी से बढ़ रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से ही काल गणना और खगोल विज्ञान का विश्वस्तरीय केंद्र रहा है, जहां समय की गणना केवल धार्मिक नहीं बल्कि पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर की जाती रही है। वे महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 15 करोड़ रुपए की लागत से बने आधुनिक साइंस सेंटर का लोकार्पण किया। इस सेंटर में साइंस गैलरी, आउटडोर पार्क, इनोवेशन हॉल और स्टूडेंट एक्टिविटी एरिया जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। सरकार ने साइंस सिटी विस्तार के लिए 25 एकड़ अतिरिक्त भूमि भी उपलब्ध कराई है, जिससे उज्जैन को भविष्य में शिक्षा और अनुसंधान का बड़ा केंद्र बनाया जाएगा।


केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अब समय आ गया है कि दुनिया ग्रीनविच टाइम की बजाय “महाकाल स्टैंडर्ड टाइम की अवधारणा पर विचार करें। उन्होंने उज्जैन को वह स्थान बताया जहां विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में समय, प्रकृति और जीवन के बीच गहरा वैज्ञानिक संबंध है।

सिंहस्थ-2028 के लिए 725 करोड़ के विकास कार्य...

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए 725 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इसमें से701 करोड़ की लागत से 19.80 किमी लंबा 4-लेन सिंहस्थ बायपास, विक्रमादित्य हेरिटेज होटल का विस्तार, यातायात और आधारभूत संरचना को मजबूत करने की योजना शामिल है। सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ में आने वाले 35 से 40 करोड़ श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें।


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