तीन राज्यों के युवा विधायकों का दो दिवसीय सम्मेलन, सशक्त लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी पर मंथन
भोपाल ।
मध्यप्रदेश विधानसभा में आयोजित ‘युवा विधायक सम्मेलन’ भारतीय लोकतंत्र के भविष्य को दिशा देने पर विचार किया गया । सम्मेलन के पहले दिन मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के 29 युवा जनप्रतिनिधियों ने सेवा, समर्पण और नवाचार की योजना व रणनीति के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण का संकल्प व्यक्त किया। सम्मेलन के दूसरे दिन ‘विकसित भारत 2047− युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियां’ विषय पर मंथन होगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवा विधायकों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें हर स्थिति में सम भाव से रहने की प्रेरणा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम से लेना चाहिए। जब उन्हें राजपाट सौंपा जाना था, तब उन्हें वनवास दे दिया गया। परंतु उन्होंने दोनों स्थितियों को समभाव से लिया। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति, समुदाय या क्षेत्र की व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों की स्वतंत्रता, न्याय, समानता और बंधुता पर आधारित एक व्यापक व्यवस्था है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि युवा वर्ग में यह धारणा बनती जा रही है कि राजनीति बहुत खराब है और वे इस विचार के कारण राजनीति में आने से बच रहे हैं। देश हित और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए इस विचार को बदलने की आवश्यकता है।
मध्यप्रदेश के विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सदन के साथ-साथ अपने क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनता से निरंतर जुड़े रहना चाहिए। सीमित संसाधनों में विकास की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बेहतर समन्वय तथा समिति व्यवस्था को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया। राजस्थान की विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने महिला जनप्रतिनिधियों के जीवन में कार्य और परिवार के बीच संतुलन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक और गुणात्मक परिवर्तन लाना ही राजनीति का वास्तविक उद्देश्य है। वहीं विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने बुनियादी ढाँचे और सड़कों की समस्याओं के समाधान के लिए एक कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए विकासोन्मुख दृष्टिकोण साझा किया।
मध्यप्रदेश की विधायक प्रियंका पैची ने कहा कि लोकतंत्र पारदर्शिता और समावेशी विकास का प्रतीक है तथा विधायक जनता और सरकार के बीच एक विश्वसनीय सेतु की भूमिका निभाते हैं। विधायक मंजू दादू ने ‘अंत्योदय’ की भावना को रेखांकित करते हुए कहा कि विधायक को शासक नहीं बल्कि सेवक के रूप में कार्य करना चाहिए। विधायक सिद्धार्थ कुशवाह ने लोकतंत्र में जनविश्वास को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और युवाओं को स्वावलंबन के अवसर प्रदान करने पर बल दिया। उन्होंने विरासत के संरक्षण के साथ आधुनिक विकास को भविष्य की समृद्धि का आधार बताया।
राजस्थान के विधायक गुरुवीर सिंह ने अनुसंधान बजट में वृद्धि, उच्च शिक्षा में नामांकन दर बढ़ाने और सीमांत किसानों के उत्थान के लिए सिंचाई प्रणाली के आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।छत्तीसगढ़ के विधायक खुशवंत सिंह ने कहा कि युवाओं को रोजगार खोजने वाले नहीं बल्कि रोजगार देने वाले बनने के लिए तकनीकी शिक्षा और डिजिटल विस्तार को बढ़ावा देना होगा। मध्यप्रदेश की प्रतिमा बागरी ने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व है कि वह क्षेत्र की समस्याओं को सदन तक पहुँचाकर उनके समाधान को जनता तक प्रभावी रूप से पहुँचाए। विधायक कामाख्या प्रताप सिंह ने बुंदेलखंड क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों का उल्लेख करते हुए शिक्षा, खेल और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई।
मध्यप्रदेश के विधायक हेमंत कटारे ने लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया। उन्होंने छात्रसंघ चुनावों को पुनः प्रारंभ करने और शिक्षा, कौशल तथा रोजगार में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता बताई। राजस्थान के विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए जनप्रतिनिधियों से जनता के साथ निरंतर जुड़े रहने का आह्वान किया। छत्तीसगढ़ की विधायक भावना बोहरा ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की पहली जिम्मेदारी अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में प्रभावी ढंग से उठाना और उनके समाधान के लिए कार्य करना है।

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