मोहन भागवत फिर बोले - हम किसी भी पंथ के हों, सबके पूर्वज समान
भोपाल।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि संघ किसी मिलिट्री या सेवा संगठन की तरह नहीं है, बल्कि यह समाज के लोगों में चरित्र, संयम और जिम्मेदारी विकसित करता है। उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान और उनकी सामाजिक कार्यप्रणाली का उदाहरण भी दिया। भागवत ने कहा कि भारत पर आक्रमण बार-बार हुए क्योंकि हम एकजुट नहीं थे, और आज भी देश की मजबूती के लिए एकता आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत केवल भूगोल नहीं है, बल्कि यह एक विशेष स्वभाव और संस्कृति का प्रतीक है। हमारे मत-पंथ, सम्प्रदाय, भाषा, जाति अलग हो सकती है। लेकिन हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती है। हम सबकी एक संस्कृति और धर्म है। हम सबके पूर्वज समान हैं। जब देश संकट में होता है, तो हम एकजुट होकर खड़े होते हैं। जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया, उन्हें सभी सम्मान की दृष्टि से देखते हैं, चाहे वे किसी भी पंथ के हों। मोहन भागवत ने हिंदू समाज को चार प्रकार में बताया कि एक वे जो गर्व से कहते हैं, “हम हिंदू हैं। दूसरे वे जो सोचते हैं, “गर्व की क्या आवश्यकता है। तीसरे, वे जो कहते हैं, “घर आएं तब बताऊंगा कि मैं हिंदू हूं। और चौथे वे जो भूल गए हैं कि हम हिंदू हैं।
भागवत ने कहा पहले और दूसरे समूह को संगठित करना प्राथमिकता है, बाकी को बाद में शामिल कर लेंगे। जो भूल गए हैं, उन्हें भी समय आने पर याद आएगा। समाज का संगठन ही देश के भाग्य को निर्धारित करता है।
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