2014 से पहले कांग्रेस के दौर में ‘फोन बैंकिंग’ से चलती थी देश की अर्थव्यवस्था: प्रधानमंत्री मोदी
नई दिल्ली।
ओडिशा के भुवनेश्वर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारतीय रिजर्व बैंक के नवस्थापित डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज भुवनेश्वर नए भारत को एक नया संस्थान दे रहा है। भुवनेश्वर में आरबीआई का डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण अवसर है। ये ओडिशा और देश के लोगों के लिए बहुत हितकारी होने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि मैं इस परियोजना से जुड़े सभी लोगों को बधाई देता हूं। आज का यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि भारत में गवर्नेंस की अप्रोच कैसे और कितनी तेजी से बदल रही है। हमारा ध्यान है, विकास की प्राथमिकता, विस्तार और आखिरी व्यक्ति तक पहुंच। आजादी के बाद देश में बड़े-बड़े शहरों का विकास हुआ, बड़े संस्थान बने, बड़े अस्पताल और बड़े एयरपोर्ट भी बने, लेकिन देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा बुनियादी सुविधाओं का इंतजार करता आ रहा था। दिल्ली में बड़े अस्पताल थे, लेकिन छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों में बेहतर इलाज के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। बड़े शहरों में हवाई यात्रा की सुविधा थी, लेकिन छोटे शहरों को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने पर उतना फोकस नहीं था। रेलवे स्टेशन आम नागरिक की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था, लेकिन रेलवे स्टेशनों पर आधुनिक सुविधाओं का अभाव था। यानी विकास का लाभ देश के हर क्षेत्र और हर नागरिक तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। हमने इसी को बदलने का प्रयास किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे लिए विकास का मतलब है भारत का संतुलित विकास और गांवों को अवसर। हमारा मकसद है गरीब परिवारों को सम्मान के साथ जीवन जीने की सुविधाएं देना। हर नागरिक को निरंतर यह विश्वास देना कि विकास की इस यात्रा में वह पीछे नहीं छूटेगा। आज देश के एक्सप्रेसवे छोटे शहरों को भी जोड़ रहे हैं। एम्स जैसे संस्थानों का निर्माण छोटे शहरों में भी हुआ है। गांवों में करीब पौने दो लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोले गए हैं। आज दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। यही गवर्नेंस का असल मकसद है, नागरिकों के जीवन को आसान बनाना और उसके सपनों को नए अवसर देना। सामान्य परिवारों को कैसे दशकों तक अभाव में रखा गया, उसका एक बड़ा उदाहरण हमारा बैंकिंग सेक्टर भी रहा है। गरीबों के नाम पर 60-70 के दशकों में बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, लेकिन 2014 तक देश की आधी आबादी बैंकिंग सिस्टम से ही बाहर थी।

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