छत्तीसगढ़: झीरम घाटी हत्याकांड मामले में मुख्य माओवादी आरोपियों की सूची से बाहर, जांच पर उठे सवाल
रायपुर।
छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी में हुए 13 वर्ष पुराने सबसे बड़े माओवादी हमले की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। हमले के मुख्य योजनाकार बताए गए तिमिरी तिरुपति उर्फ देवजी और प्रमुख कमांडर बारसे सुक्का उर्फ देवा एनआइए की वांछित सूची में शामिल रहे, लेकिन न्यायालय में इन पर मुकदमा नहीं चला।
एनआईए ने वर्ष 2013 में झीरम हत्याकांड की जांच के दौरान 23 दिसंबर 2023 को प्रकाशित इश्तहार में 19 वांछित माओवादियों के नाम, फोटो और अन्य जानकारी दी गई थी। इसमें देवजी का नाम सबसे ऊपर था, जबकि बारसे सुक्का उर्फ देवा की जानकारी भी फोटो सहित दी गई थी। एनआइए ने उनकी गिरफ्तारी अथवा सूचना देने पर इनाम घोषित किया था।
ऐसे में आत्मसमर्पण के बाद भी इनसे पूछताछ न होने पर प्रश्न उठ रहे हैं।बैठक में तय हुआ था हमले का स्थानजांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार, फरवरी 2013 में बीजापुर के पिड़िया में हुई बैठक में हमले की योजना बनी थी। मूल योजना मिनपा क्षेत्र में हमले की थी, जिसे बाद में दरभा क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद माओवादियों की सशस्त्र टुकड़ियों को दरभा भेजा गया। देवा दरभा डिवीजन कमेटी का सचिव रह चुका था और बाद में बटालियन-एक का कमांडर बना।
.jpg)
No comments