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वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर BJP ने महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया


नई दिल्ली

 भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 19 अगस्त 2026 को 1937 के प्रस्ताव को दोबारा स्वीकार करते हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो पदों के गायन तक सीमित रखने के फैसले का कड़ा विरोध किया है। भाजपा ने इसे राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कांग्रेस के निर्णय की आलोचना की।

भाजपा का कहना है कि वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रीय गीत, भारत माता के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति और स्वतंत्रता संग्राम की राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक है। पार्टी ने कहा कि इसके पूर्ण स्वरूप, सम्मान और ऐतिहासिक विरासत की रक्षा के लिए वह देशभर में अभियान चलाएगी।

पूर्ण वंदे मातरम् के सम्मान की बात

भाजपा ने अपने प्रस्ताव में कहा कि वह पूर्ण वंदे मातरम् के सम्मान, गरिमा और राष्ट्रीय स्वरूप की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। पार्टी के अनुसार, राष्ट्रीय गीत को केवल राजनीतिक या चुनावी मुद्दे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह देश के स्वतंत्रता संघर्ष और राष्ट्र-जागरण से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत है।

पार्टी ने यह भी कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति का कोई प्रस्ताव संवैधानिक संस्थाओं और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता। भाजपा ने 1937 के राजनीतिक निर्णय को 1950 के संवैधानिक फैसलों और 2026 में संसद द्वारा राष्ट्रीय गीत को दिए गए संरक्षण से जोड़ते हुए कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाया।

तुष्टीकरण की राजनीति का लगाया आरोप

भाजपा ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय गीत को किसी भी तरह के सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टीकरण या वोट-बैंक की राजनीति के अधीन नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी ने कहा कि वंदे मातरम् के सम्मान और विरासत से राजनीतिक सुविधा के लिए किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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