ममता बनर्जी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, बागी नेता बने रहेंगे नेता प्रतिपक्ष
कोलकाता
पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को कलकत्ता हाईकोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने विधानसभा स्पीकर के फैसले को चुनौती देने वाली टीएमसी की याचिका पर तत्काल राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति पर फिलहाल कोई भी स्टे (रोक) लगाने से मना कर दिया है, जिसका सीधा मतलब यह है कि बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ही फिलहाल इस महत्वपूर्ण पद पर बने रहेंगे।
अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऋतब्रत बनर्जी कौन हैं और उन्हें लेकर इतना बड़ा विवाद क्यों खड़ा हुआ है। दरअसल, ऋतब्रत बनर्जी टीएमसी के ही कद्दावर नेता हैं, लेकिन हालिया चुनाव में पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद उन्होंने अपनी ही आलाकमान और पार्टी के खिलाफ खुलेआम बगावत का बिगुल फूंक दिया था। उनके इसी बागी रुख के बीच स्पीकर द्वारा उन्हें विपक्ष का नेता चुन लिया गया, जिसने टीएमसी की रातों की नींद उड़ा दी है।
स्पीकर के इस फैसले से पूरी तृणमूल कांग्रेस बेहद असमंजस और गुस्से में है। पार्टी का साफ तौर पर कहना है कि नेता प्रतिपक्ष जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक नियुक्ति स्पीकर अपनी मर्जी या पसंद-नापसंद के आधार पर नहीं कर सकते। इसके लिए यह देखना बेहद जरूरी और अनिवार्य है कि विधानसभा में किस पार्टी के पास कितने विधायकों का संख्या बल है, कौन सा दल असली विपक्ष की भूमिका में है और जमीनी राजनीतिक हकीकत क्या है। टीएमसी ने स्पीकर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि एक बागी नेता को विपक्ष का मुखिया बनाकर विधानसभा की पुरानी गौरवशाली परंपराओं को तार-तार किया गया है और जानबूझकर राजनीतिक संतुलन बिगाड़ने का प्रयास हुआ है।
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