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अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान विकासशील देशों की आर्थिक मजबूती बनाए रखने में करे मदद- नरेन्द्र मोदी


नई दिल्ली। 


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को विकासशील देशों को वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट के झटकों को झेलने और आर्थिक मजबूती बनाए रखने में मदद करने के लिए सहायक तंत्र बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संकट के कारण ईंधन, खाद और खाद्य सप्लाई चेन में आई रुकावटों का असर लंबे समय तक ‘वैश्विक दक्षिण’ पर पड़ता रहेगा। उन्होंने कहा, “अगर हम सच में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करना चाहते हैं, तो सबसे कमजोर देशों को इन संकटों का बोझ अकेले नहीं उठाने देना चाहिए।”

विकास किसके लिए, किसके साथ और किस दिशा में 

 प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकास का मतलब सिर्फ़ जीडीपी या व्यापार के आंकड़े नहीं हैं। असली सवाल यह है कि विकास किसके लिए, किसके साथ और किस दिशा में हो रहा है? भारत का अनुभव दिखाता है कि साझा विकास से उम्मीदों को हकीकत में बदला जा सकता है। भारत की विकास गाथा समावेश, बड़े पैमाने और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की कहानी है।मोदी ने कहा कि यह ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ से प्रेरित है। भारत ने जी20 अध्यक्षता, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (आईएमईसी) की शुरुआत और कई अन्य मौकों पर इसे दर्शाया है। उन्होंने सुझाव दिया कि आईएमईसी के विजन की तरह ही हमें अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप देशों के साथ ‘संपर्क परियोजनाओं’ पर काम करना चाहिए।


ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप’ बनाने का आह्वान

प्रधानमंत्री ने ‘ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप’ बनाने का भी आह्वान किया और कहा कि हम कौशल मैपिंग और भरोसेमंद कुशल लोगों की आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज कई समाज बूढ़े होते जा रहे हैं, जबकि भारत और ‘वैश्विक दक्षिण’ के अन्य देशों में युवा प्रतिभा, उद्यमिता और कौशल की भरमार है।

यूरोपीय नेताओं से की मुलाकात, एफटीए को शीघ्र अपनाने पर दिया जोर

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान यूरोपियन परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन आयोग की अध्यक्षा उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते पर जल्द से जल्द हस्ताक्षर करने और उसे लागू करने पर जोर दिया। उनका मानना रहा कि इससे व्यापार और निवेश के लिए बड़े अवसर खुलेंगे और सप्लाई चेन में विविधता लाने में मदद मिलेगी। मौजूदा अस्थिर भू-राजनीतिक माहौल में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

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