महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) के भीतर संभावित टूट की चर्चा तेज हो गई है। 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद पार्टी को बड़ा झटका लगा था और अब एक बार फिर उद्धव ठाकरे के सामने अपने संगठन को एकजुट बनाए रखने की चुनौती खड़ी होती दिख रही है। हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी की आशंकाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
संभावित राजनीतिक हलचलों के बीच उद्धव ठाकरे ने रविवार को अपने आवास 'मातोश्री' में शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा सांसदों की अहम बैठक बुलाई। हालांकि, पार्टी के नौ सांसदों में से केवल चार सांसद ही बैठक में मौजूद रहे। इनमें अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल शामिल थे। बाकी पांच सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों को और तेज कर दिया।
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