पश्चिम बंगाल में खिला कमल , असम में वापसी , पुडुचेरी में एनडीए , तमिल में विजय रथ, केरल में कांग्रेस
नई दिल्ली।
पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को पश्चिम बंगाल में बड़ा बहुमत प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में कमल खिलने के साथ ही भाजपा के खाते में एक और राज्य जुड़ गया। असम और पुडुचेरी में भाजपा और एनडीए की सरकार दोबारा सत्ता में लौटी है। दक्षिण के दो बड़े राज्यों केरल और तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। केरल में वामदलों को हटा कांग्रेस नेतृत्व वाला गठबंधन 10 सालों बाद लौटा है। तमिलनाडु में एक साल पहले बनी एक्टर विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी है।
विधानसभा उपचुनाव के नतीजे भी भाजपा के पक्ष में
विधानसभा उपचुनाव के नतीजे भी भाजपा के पक्ष में आए हैं। पार्टी ने सात में से चार पर जीत दर्ज की है। एक सीट पर उसके सहयोगी दल के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है। कर्नाटक की दोनों सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की है।
पांच राज्यों की सात विधानसभा सीटों के उपचुनाव में महाराष्ट्र की बारामती सीट से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुनेत्रा पवार बड़े अंतर से जीती हैं। राहुरी से भाजपा उम्मीदवार अक्षय कार्डिले, गुजरात के उमरेठ सीट से भाजपा उम्मीदवार हर्षदभाई गोविंदभाई परमार ने जीत दर्ज की है। नगालैंड के कोरीडांग सीट पर भाजपा उम्मीदवार दाओचिर आई. इम्चेन, त्रिपुरा की धर्मनगर सीट पर भाजपा उम्मीदवार जहर चक्रवर्ती ने जीत दर्ज की है। वहीं कर्नाटक के बागलकोट सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार उमेश हुलप्पा ने जीत दर्ज की है, जबकि दावनगेरे दक्षिण सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार समर्थ शमनूर मल्लिकार्जुन ने जीत दर्ज की है।
1970 के बाद से पहली बार किसी भी राज्य में सत्ता में नहीं होंगे वामदल
केरल विधानसभा चुनावों के रुझानों में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के पिछड़ने के बाद देश में 1970 के दशक के बाद पहली बार ऐसा होगा कि किसी भी राज्य में वाम दलों की सरकार नहीं होगी। इससे पहले साल 2011 में पश्चिम बंगाल और साल 2018 में त्रिपुरा में भी वाम दलों को सत्ता से बाहर होना पड़ा था। केरल में पार्टी मुख्य विपक्षी दल बनी हुई है। हालांकि, बंगाल में साल 2011 में 62 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बनी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) साल 2021 आते-आते विधानसभा में एक भी सीट नहीं जीत पाई। वहीं, त्रिपुरा में साल 2018 में 16 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी पार्टी साल 2023 के चुनाव में महज 11 सीटों पर सिमट गई।
केरल विधानसभा चुनावों के रुझानों में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के पिछड़ने के बाद देश में 1970 के दशक के बाद पहली बार ऐसा होगा कि किसी भी राज्य में वाम दलों की सरकार नहीं होगी। इससे पहले साल 2011 में पश्चिम बंगाल और साल 2018 में त्रिपुरा में भी वाम दलों को सत्ता से बाहर होना पड़ा था। केरल में पार्टी मुख्य विपक्षी दल बनी हुई है। हालांकि, बंगाल में साल 2011 में 62 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बनी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) साल 2021 आते-आते विधानसभा में एक भी सीट नहीं जीत पाई। वहीं, त्रिपुरा में साल 2018 में 16 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी पार्टी साल 2023 के चुनाव में महज 11 सीटों पर सिमट गई।
जीत के बाद बदला नहीं, बदलाव की बात होनी चाहिए : प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उल्लेखनीय सफलता के बाद कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार स्वाभाविक है, लेकिन जीत के बाद बदले की भावना नहीं बल्कि बदलाव और विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इसे भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताते हुए कहा कि इन चुनाव परिणामों ने दुनिया को दिखाया है कि भारत को “लोकतंत्र की जननी” क्यों कहा जाता है। उन्होंने कहा कि वर्षों की साधना जब सिद्धि में बदलती है, तो जो संतोष और खुशी मिलती है, वही आज देशभर के भाजपा कार्यकर्ताओं के चेहरों पर दिखाई दे रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को इस जीत का श्रेय देते हुए कहा कि “आपने कमाल कर दिया, कमल खिला दिया और नया इतिहास रच दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनावों में भारी मतदान, विशेषकर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। पश्चिम बंगाल में करीब 93 प्रतिशत मतदान को उन्होंने ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में भी नए मतदान रिकॉर्ड बने हैं। उन्होंने कहा कि यह “भारत के लोकतंत्र की सबसे उजली तस्वीर” है, जहां हर वर्ग सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उल्लेखनीय सफलता के बाद कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार स्वाभाविक है, लेकिन जीत के बाद बदले की भावना नहीं बल्कि बदलाव और विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इसे भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताते हुए कहा कि इन चुनाव परिणामों ने दुनिया को दिखाया है कि भारत को “लोकतंत्र की जननी” क्यों कहा जाता है। उन्होंने कहा कि वर्षों की साधना जब सिद्धि में बदलती है, तो जो संतोष और खुशी मिलती है, वही आज देशभर के भाजपा कार्यकर्ताओं के चेहरों पर दिखाई दे रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को इस जीत का श्रेय देते हुए कहा कि “आपने कमाल कर दिया, कमल खिला दिया और नया इतिहास रच दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनावों में भारी मतदान, विशेषकर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। पश्चिम बंगाल में करीब 93 प्रतिशत मतदान को उन्होंने ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में भी नए मतदान रिकॉर्ड बने हैं। उन्होंने कहा कि यह “भारत के लोकतंत्र की सबसे उजली तस्वीर” है, जहां हर वर्ग सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रहा है।

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