शादी के बाद दुल्हन और उसके परिवार का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली।
दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने समाज में व्याप्त दहेज प्रथा और उससे जुड़ी मानसिकता पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि शादी के बाद दुल्हन और उसके परिवार का अपमान करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। न्यायालय ने सवाल उठाया कि यदि कुछ लोग दुल्हन और उसके परिवार का सम्मान नहीं कर सकते, तो वे विवाह ही क्यों करते हैं। मामले की सुनवाई जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ कर रही थी। यह मामला छत्तीसगढ़ की एक महिला की मृत्यु से जुड़ा है, जिसने शादी के तीन वर्ष के भीतर अपने ससुराल में फांसी लगाकर जान दे दी थी। आरोप है कि महिला को लगातार दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था।
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि दहेज की मांग और उससे जुड़ा उत्पीड़न केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि समाज में यह संदेश जाना चाहिए कि दुल्हन और उसके परिवार का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने टिप्पणी की कि कई मामलों में विवाह के बाद लड़की के परिवार पर लगातार आर्थिक दबाव बनाया जाता है। उनसे बार-बार मांगें की जाती हैं और उन्हें अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
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