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कान्हा टाइगर रिजर्व में छोड़े गए चार और ‘जंगली भैंस‘, संख्या बढ़कर आठ हुई

 


भोपाल। 

करीब एक सदी बाद मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में ‘जंगली भैंस’ की वापसी से वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में नया अध्याय जुड़ गया है। काजीरंगा से लाए गए चार और ‘जंगली भैंसों‘ को सुपखार क्षेत्र में छोड़े जाने के बाद अब कान्हा में इनकी संख्या बढ़कर आठ हो गई है। कान्हा टाइगर रिजर्व, मंडला के सुपखार परिक्षेत्र में शुक्रवार को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) समिता राजोरा एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति ने 4 और जंगली भैंसों को विशेष रूप से निर्मित बाड़े में सफलतापूर्वक मुक्त किया। 

दरअसल, प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में वन विभाग जैव विविधता संरक्षण और विलुप्तप्राय प्रजातियों के पुनर्वास के लिये विशेष अभियान चला रहा है। इसी के अंतर्गत असम के प्रसिद्ध काजीरंगा टाइगर रिजर्व से ‘जंगली भैंस’ को कान्हा के सुपखार क्षेत्र में पुनर्स्थापित किया जा रहा है। सुपखार वह क्षेत्र है, जहां ऐतिहासिक रूप से जंगली भैंसों की उपस्थिति होने के प्रमाण प्राप्त हुए हैं।

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