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कफ सिरप मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट ,सीबीआई से जांच की मांग

 


नई दिल्ली। 

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में दूषित कफ सिरप पीने से 16 बच्चों की मौत की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर इस याचिका में देश भर में सभी दूषित कफ सिरप बैचों पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें वापस मंगाने तथा सभी सिरप-आधारित फ़ॉर्मूलेशनों की अनिवार्य जाँच की भी माँग की गई है। अन्य राज्यों में हुई ऐसी ही घटनाओं का हवाला देते हुए, तिवारी ने आग्रह किया कि जाँच सर्वोच्च न्यायालय के किसी पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। 

याचिका में शोक संतप्त परिवारों को मुआवज़ा देने और दवा सुरक्षा अलर्ट की वास्तविक समय पर निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस पोर्टल बनाने की मांग की गई है। इसमें संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का भी हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है यह अधिकार सुनिश्चित करता है कि उपचार के लिए बनाई गई कोई भी दवा मौत का कारण न बने। 

यह मामला छिंदवाड़ा में हुई उस त्रासदी से जुड़ा है जहाँ कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से 15 साल से कम उम्र के 14 बच्चों की मौत हो गई थी। राज्य सरकार द्वारा किए गए परीक्षणों में पाया गया कि तमिलनाडु स्थित श्रीसन फार्मा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) पाया गया था - एक ज़हरीला औद्योगिक विलायक जो दवाइयों में इस्तेमाल के लिए प्रतिबंधित है। 

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