अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सामाजिक स्थिति पर भी हो चर्चा
08 -मार्च 2024 की सुबह शुरुआत पूरे विश्व में महिलाओ को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं मिलेगी। इस तरह की शुभकामनाएं देने का सिलसिला महिला दिवस पर अखबारों , सोशल मीडिया व टीवी चैनलों द्वारा संदेश के साथ शुरू हो जाता है। महिलाओं की उन्नति ,सामाजिक स्थान व शिक्षा ,स्वास्थ्य को लेकर जगह जगह परिचर्चा भी चलती रहती है। सुबह से रात तक महिलाओं के योगदान व तरक्की पर प्रशंसा के पुल बांधे जाते है। महिलाओं के बिना समाज अधुरा है , शिक्षक से लेकर वैज्ञानिक, चिकित्सक , पत्रकार , प्रशासनिक पदों से लेकर राष्ट्रपति बनने तक की महिलाओं के गौरव की तारीफ की जाएगी, तारीफ की जाना भी जरूरी है । किन्तु इस दौरान महिलाओं की पारिवारिक स्थिति पर कोई चर्चा नहीं होती । होगी भी तो सामान्य जैसी ।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मै मुनमुन सोनी अपने माध्यम से भारतीय,महिलाओं की पारिवारिक स्थिति पर स्पष्ट करने के लिए हिम्मत कर अपनी आपबीती बताना चाहूंगी। मेरी आयू 36 वर्ष है। 24 वर्ष की आयु में मेरा विवाह एक ऐसे व्यक्ति से हुआ, जिसने मुझे पसंद किया। विवाह पूर्व पूरे जीवन साथ निभाने का वादा किया। मुझे सर्वगुण सम्पन्न व प्रतिभाशाली माना। मेरे पति ने विवाह पूर्व अपना नाम व अपना परिचय ,शिक्षा सभी कुछ आधा अधूरा बताया। पारिवारिक सहमति से कोर्ट में विवाह किया। विवाह के समय विवाह प्रमाणपत्र से ओरिजनल नाम व धर्म का पता चला। मैंने सोचा किस्मत में यह शादी होना लिखा था। इसके बाद मैंने सब कुछ स्वीकार कर लिया। बाद मे चर्च में ईसाई रीति रिवाज से भी विवाह हुआ। मैने अपना धर्म भी बदल लिया। ससुराल के सारे रीति रिवाज अपना लिए , किन्तु शादी के कुछ समय बाद से ही घरेलू हिंसा की शिकार होना शुरू हो गई। फिर एक बेटी को जन्म दिया ,अपना जीवन यापन ,दैनिक खर्च स्वयं वहन करने के लिए कपड़े सिलने का कार्य किया।
विवाह के दो वर्ष बाद मेरे पति के साथ बाईक पर चर्च से प्रेयर कर घर आते समय बाइक और ट्रक का एक्सीडेंट हो गया। मेरा एक पैर क्षतिग्रस्त हो गया और मै 70% प्रतिशत विकलांगता की श्रेणी मै आ गई। मेरी सवा -साल की बेटी को भी फ्रैक्चर हुआ। उपर वाले की शुक्रगुजार हूॅ, इस एक्सीडेंट मै मेरे पति को खंरोच भी नही आई। एक्सीडेंट के बाद ईलाज के लिये मुझे मेरे मायके भिजवा दिया गया। मेरी ससुराल मे मेरी सास, जेठानी व दो नन्द भी है, जिन्हे लगता है कि मै शुरू से ही पसंद नहीं थी। मेरे विरुद्ध मेरे पति के कान भरे जाते। इस दौरान मेरे पति ने मेरा पक्ष कभी नही लिया। इस दौरान घर में ,सार्वजनिक स्थानों व सामाजिक कार्यक्रमों में अपमानित एवं हिंसा की शिकार हुई । यह क्रम 09 साल चलता रहा। एक सार्वजनिक स्थान पर मेरे पति द्वारा मुझे मारा गया ,शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाया गया। घायल अवस्था में मुझे मेरी बेटी के साथ घर से निकलने के लिये मजबूर कर दिया। इस पूरी घटना की शिकायत पुलिस से भी की गई। एफआईआर के बाद भी मुझ विकलांग महिला का मेडिकल करवाने मे 04 दिन लग गए। वर्तमान में अपनी 09 वर्षीय बेटी के साथ अपने मायके मे निवासरत हूॅ।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यही कहना है कि मेरे साथ हुई घटना से मिलती जुलती अमानवीयता जाने कितने परिवारों में हो रही होगी , जो कभी अपनी आवाज सार्वजनिक नही करती। मेरा मानना है महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान के लिये पारिवारिक वातावरण से शुरुआत हो। परिवार में महिला महिलाओं का सम्मान करें, एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा नही। पारिवारिक प्रतिस्पर्धा परिवार बिखेर देती है । आज जो महिलाएं महिला दिवस की बधाई स्वीकार कर रही है ,क्या वह एक दूसरे को शुभकामनाएं दे रही है। मैंने हिम्मत की कि अपने साथ हुए अन्याय को सार्वजनिक कर रही हूँ ,यह सामाजिक चर्चा का विषय बनेगा। प्रश्न मुझसे पूछे जाएंगे, मेरे पति से नही। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सभी महिलाओं को यह संदेश देना चाहती हूँ कि अन्याय सहना अन्याय करने के बराबर है। इसलिए इसका सामना करना भी जरूरी है।


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