सागर के जहरीली शराब मामले में सरकार का बड़ा एक्शन, पांच अधिकारी निलंबित, एक मुख्यालय अटैच
भोपाल।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर जिले की बंडा तहसील के तीन गांवों में नकली शराब पीने से हुई लोगों की मौतों के मामलों मे सख्त एक्शन लिया है। मामले में आबकारी और पुलिस विभाग के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है, जबकि एक अधिकारी को मुख्यालय अटैच कर दिया है। डॉ. यादव के निर्देश पर आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सागर की सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत्त के आबकारी उप-निरीक्षक प्रोशनी उरेती को निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में समान रूप से जिम्मेदार मानते हुए उपायुक्त एवं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को जिले से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घटना को लेकर कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्र में तत्काल जांच, राहत और उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मामले में उप मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि इस हादसे के पीछे जो भी व्यक्ति जिम्मेदार होगा, उसे किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार इस पूरे प्रकरण में सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
खुलेआम चल रहा मध्यप्रदेश में अवैध शराब का कारोबार: उमंग सिंगार
घटना पर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सागर की जहरीली शराब त्रासदी साबित करती है कि मध्यप्रदेश में अवैध शराब का कारोबार खुलेआम चल रहा है। गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास है, फिर भी प्रशासन की नाक के नीचे यह कारोबार कैसे चल रहा है? सरकार तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराए, दोषियों और संरक्षण देने वालों पर सख्त कार्रवाई करे। प्रत्येक मृतक परिवार को ₹25 लाख मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।


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