"च" से चेतना तक : आज की नारी
प्रदीप सक्सेना
हिन्दी वर्णमाला का प्रत्येक अक्षर अपने भीतर एक विशेष अर्थ और व्यापक संसार समेटे हुए है। "च" वर्ण भी ऐसा ही एक अक्षर है, जो नारी के शरीर, सौन्दर्य, वेशभूषा, श्रृंगार, साज-सज्जा, संस्कार, भाव और व्यक्तित्व के अनेक रूपों को अभिव्यक्त करता है। "च" से चेतना तक की यह यात्रा नारी के बाहरी आकर्षण से लेकर उसके आंतरिक गुणों और आत्मबल तक का परिचय कराती है।
नारी के शरीर एवं सौन्दर्य की बात करें तो चमड़ी (Skin), चक्षु (आँख / Eye), चोटी (Braid / Plait), चेहरा (मुखमण्डल / Face), चिबुक (ठोड़ी / Chin), चेस्ट (छाती / Chest), चर्वणांग (जबड़ा, दाँत आदि का समूह), चटीला (जीभ, जुबान जो चलाने, चबाने और चाटने के काम आती है), नख (नाखून / Nail), चमक (Glow / Radiance), चार्म (Charm), चीक्स (गाल / Cheeks), चाल (गति / Gait), चंचलता (Liveliness), चमक-दमक (Lustre), चुंबक आँखें (Magnetic Eyes), Curls (घुँघराले बाल), Complexion (रंग-रूप) तथा Contour (मेकअप तकनीक) जैसे शब्द उसकी प्राकृतिक सुंदरता, आकर्षण और व्यक्तित्व की विविध छवियों को प्रस्तुत करते हैं। उसके मुखमण्डल की आभा, आँखों की चमक, बालों की शोभा और व्यक्तित्व की गरिमा उसे विशिष्ट बनाती है।
वस्त्र एवं परिधान के क्षेत्र में चूनरी, चुन्नी, चोली, चड्डी, चूड़ीदार पजामा, चोला (ऊपर से नीचे तक या कमर तक ढीला-ढाला कुर्ता या कोई वस्त्र), चादर (शाल जैसा ओढ़ने का वस्त्र), चुन्नटदार सूट, चिकनकारी कुर्ती, चीनी कॉलर कुर्ती, Coat (कोट), Casual Top (कैज़ुअल टॉप), Cotton Dress (कॉटन ड्रेस), Cardigan (कार्डिगन), Cap (कैप), चाक वाला कुर्ता (Flared Kurta), चाँदनी साड़ी, चुस्त लेगिंग, चौड़ा पलाज़ो, Chiffon Saree (शिफॉन साड़ी), Crop Top (क्रॉप टॉप), Culottes (क्यूलोट्स), Cape (केप) और Cami (कैमी) जैसे परिधान नारी की सादगी, सौन्दर्य और आधुनिकता का परिचय देते हैं।
आभूषण एवं श्रृंगार में चूड़ी, चूड़ा, चन्द्रहार, चेन (गले में पहनी जाने वाली), चुटकी (पैर की उँगलियों में पहने जाने वाले बिछिये), चाप, चाँदबाली (कान में पहने जाने वाले आभूषण), Charm Bracelet (चार्म ब्रेसलेट), Crystal Pendant (क्रिस्टल पेंडेंट), चमकी (Small Forehead Ornament), चम्पाकली झुमके, चौकर नेकलेस, Choker (चोकर) तथा Cubic Zirconia (क्यूबिक ज़िरकोनिया) जैसे अलंकार नारी के श्रृंगार को पूर्णता प्रदान करते हैं। भारतीय संस्कृति में आभूषण केवल सजावट का माध्यम नहीं, बल्कि परम्परा, सौभाग्य और सौन्दर्य के प्रतीक भी हैं।
साज-सज्जा एवं उपयोगी वस्तुओं में चिमटी (बाल में लगाई जाने वाली क्लिप), चप्पल, Clutch Purse (क्लच पर्स), Cosmetics (कॉस्मेटिक्स), Compact Powder (कॉम्पैक्ट पाउडर), Cream (क्रीम), Hair Clip (हेयर क्लिप), Comb (कंघी), Cleanser (क्लेंज़र), Concealer (कंसीलर), Curling Iron (कर्लिंग आयरन) तथा Claw Clip (क्लॉ क्लिप) जैसी वस्तुएँ नारी के दैनिक जीवन और आत्म-देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये साधन उसकी व्यक्तिगत रुचि, सलीके और सौन्दर्य-बोध को अभिव्यक्त करते हैं।
किन्तु नारी का वास्तविक स्वरूप केवल बाहरी रूप-रंग और श्रृंगार तक सीमित नहीं है। उसकी चेतना (Awareness / Consciousness), चतुराई (Smartness / Cleverness), चरित्र (Character / Persona), चाल (Style of Moving), चाह (Desire / Wish), चाहत (Love / Yearning), Self Care (स्वयं की देखभाल), Confidence (आत्मविश्वास) और Compassion (करुणा) ही उसके व्यक्तित्व की सच्ची पहचान हैं। यही गुण उसे परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में एक सशक्त और प्रेरणादायी शक्ति बनाते हैं।
इस प्रकार "च" वर्ण से जुड़े ये विविध शब्द नारी के शरीर, सौन्दर्य, वस्त्र, आभूषण, साज-सज्जा और व्यक्तित्व के समग्र स्वरूप को दर्शाते हैं। चमड़ी से चेतना तक, चूनरी से चरित्र तक और चूड़ी से Compassion तक की यह यात्रा आधुनिक नारी के बहुआयामी व्यक्तित्व, उसकी गरिमा, आत्मविश्वास और जीवन-सौन्दर्य का सुंदर परिचय प्रस्तुत करती है।
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