भोजशाला हिन्दुओं की, मप्र हाई कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला , माना मां वाग्देवी का मंदिर
भोपाल।
मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय ने भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि भोजशाला परिसर मंदिर ही है। मस्जिद पक्ष को अलग जमीन दी जाएगी। इसके लिए मस्जिद पक्ष सरकार से याचिका करे। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इसे मां वाग्देवी का मंदिर माना है। दरअसल, एएसआई ने कोर्ट में 2100 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। इस रिपोर्ट को एएसआई के 98 दिनों तक चले सर्वे के बाद तैयार किया था, जिसमें कई अहम तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार खुदाई के दौरान मूर्तियां, सिक्के और कई ऐतिहासिक अवशेष मिले हैं।
न्यायालय ने एएसआई का 2003 का वह आदेश भी रद्द कर दिया, जिसमें एएसआई ने भोजशाला में हिंदुओं को पूजा का अधिकार नहीं दिया था। न्यायालय ने इस आदेश को भी खारिज कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को नमाज पढ़ने का अधिकार दिया गया था। न्यायालय ने कहा है कि मस्जिद पक्ष यदि सरकार को आवेदन देता है तो उसे अलग जमीन उपलब्ध कराई जाएगी, साथ ही यह कहा कि सरकार इंग्लैंड से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का प्रयास करें
उच्चतम न्यायालय जाएगा मुस्लिम पक्ष एवं जैन समाज
भोजशाला के फैसले पर धार शहर काजी वकार सादिक ने कहा है कि हम फैसले की समीक्षा करेंगे। इसके बाद हम उच्चतम न्यायालय जाएंगे।उधर भोजशाला मामले में जैन समाज की ओर से दायर याचिका न्यायालय ने खारिज कर दी है। जैन समाज की ओर से पैरवी कर रहीं अधिवक्ता प्रीति जैन ने कहा कि सुनवाई के दौरान दावा किया गया था कि तीर्थंकरों की मूर्तियों के अवशेष आज भी ब्रिटिश म्यूजियम में मौजूद हैं और उन्हें उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर जैन समाज उच्च न्यायालय जाएगा।
हिंदू पक्ष ने उच्च न्यायालय में दायर की कैविएट
भोजशाला विवाद मामले में हिंदू पक्ष ने उच्च न्यायालय में कैविएट दायर की है। याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह विशेन की ओर से शुक्रवार को अधिवक्ता बरुण कुमार सिन्हा ने यह कैविएट दाखिल की। इसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर होने वाली किसी भी अपील पर हिंदू पक्ष को सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए। दरअसल, जितेंद्र सिंह विशेन इस मामले में छठे याचिकाकर्ता थे, जिस पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने फैसला सुनाया।
वाग्देवी की मूल प्रतिमा को मुगलों ने किया था खंडित, 117 साल से लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में है कैद
गौरतलब है कि लंबे समय से भोजशाला को मुस्लिम मस्जिद मानते आ रहे थे, तो हिंदू भोजशाला यानी की मां वाग्देवी का मंदिर। भोजशाला में जिस मां वाग्देवी की पूजा होती है, हकीकत में वह मूल प्रतिमा मप्र के धार से 7350 किमी दूर ब्रिटिश म्यूजियम ग्रेट रसल स्ट्रीट में रखी है। मुगलों के आक्रमण के बाद खंडित हुई मां वाग्देवी की प्रतिमा को अंग्रेजों ने खुदाई कर 1875 में निकाला था। इसके बाद 117 साल से ब्रिटिश म्यूजियम में 7 से 8 फीट ऊंचे कांच के बॉक्स में मां की 4 से 5 फीट ऊंची प्रतिमा के पास ही पूरी प्रतिमा रखी हुई थी।
.jpg)
No comments