वित्त मंत्री सीतारमण ने भारत में महंगाई में तेज वृद्धि की आशंका को किया खारिज
नई दिल्ली।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हाल ही में आई तेजी के बावजूद सरकार को मुद्रास्फीति में तीव्र वृद्धि की उम्मीद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि घरेलू मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक के सहनशीलता बैंड के निचले स्तर के करीब बनी हुई है। संसद में लिखित जवाब में सीतारमण ने कहा कि मुद्रास्फीति की वर्तमान स्थिति नीति निर्माताओं को बाहरी मूल्य झटकों से कुछ हद तक बचाव प्रदान करती है।
सीतारामन ने कहा कि चूंकि भारत में मुद्रास्फीति निचले स्तर के करीब है, इसलिए फिलहाल मुद्रास्फीति पर इसका कोई खास असर पड़ने का अनुमान नहीं है। ईरान द्वारा सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में मोजतबा खामेनेई को नामित करने के बाद वैश्विक तेल की कीमतों में शुरुआती कारोबार में लगभग 26% की तेजी आई और ये जुलाई 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। अयातुल्ला अली खामेनेई की एक सप्ताह से अधिक समय पहले इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों में हत्या कर दी गई थी।
सीतारामन ने उल्लेख किया कि 28 फरवरी को तनाव में नवीनतम वृद्धि से पहले लगभग एक वर्ष से वैश्विक तेल की कीमतें गिर रही थीं। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव में वृद्धि के चलते कच्चे तेल की भारतीय बास्केट की कीमत फरवरी के अंत में 69.01 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 2 मार्च तक 80.16 डॉलर प्रति बैरल हो गई। इस वृद्धि के बावजूद, सरकार का मानना है कि उपभोक्ता कीमतों पर इसका प्रभाव फिलहाल सीमित रहेगा
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