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भाजपा को मिले ‘अच्छे दिन’ आरएसएस की तपस्या का ही परिणाम: मोहन भागवत

 


नई दिल्ली

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भाजपा और संघ के रिश्तों को लेकर एक बार फिर स्पष्ट और मजबूत संदेश दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भाजपा को मिले ‘अच्छे दिन’ आरएसएस की तपस्या और प्रतिबद्धता का ही परिणाम हैं। भागवत का यह बयान 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के उस कथन के बाद अहम माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा आरएसएस के बिना भी चुनाव जीत सकती है। उस बयान को लेकर संघ कार्यकर्ताओं में असंतोष देखा गया था।

सरसंघचालक ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के लिए आरएसएस ने दशकों तक निरंतर प्रयास किए और जिसने इस आंदोलन का साथ दिया, उसे राजनीतिक रूप से भी लाभ मिला। उन्होंने संकेतों में यह भी स्पष्ट कर दिया कि संघ के नेतृत्व में चले आंदोलनों का फायदा भाजपा को चुनावी राजनीति में मिला है।

भागवत ने यह भी रेखांकित किया कि भाजपा का वैचारिक आधार आज भी आरएसएस ही है और संघ उसका मातृ संगठन बना हुआ है। माना जा रहा है कि यह बयान संघ कार्यकर्ताओं के मनोबल को बनाए रखने के साथ-साथ भाजपा नेतृत्व के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि संगठन का विस्तार चाहे जितना हो जाए, उसकी जड़ें अब भी संघ की विचारधारा में ही हैं।

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